आखिर हत्या हो ही गई भारत देश के लोकतंत्र की....
आखिर हत्या हो ही गई भारत देश की क्योंकि भारत देश भी एक देश है जहां लोकतंत्र होता है माफ कीजिए होता था लेकिन अब नहीं है इस भारत देश में बहुत बड़ा तमाशा देखने को मिल रहा है शिक्षा के द्वार बन्द हैं और जनता अपने आप में इतनी धार्मिक मदमस्त हैं की मौत के इस घाट में वह खुद कब बलि बन गई पता ही ना चला गलती होती हैं माना कि इस देश में सरकार को जो भी शक्तियां मिली वह सब इस देश की जनता ने दिया हैं लेकिन उसे अब सुधारना जरूरी नहीं है, संविधान तो इसे सुधारने की इजाजत देता हैं, लेकिन इस्तेमाल तो जनता को करना है अब तमाशा भी गजब है कि लोकतंत्र जिसमें जनता आती है अपनी ही मौत का तमाशा स्वयं दर्शक बनकर देख रही है कि कब उसका नंबर कब आएगा । और आज भी जनता मुक दर्शक बनकर देख रही है सरकार बड़ी-बड़ी चुनावी रैलियां कर रही है लोग सीधे वोट देने भी जा रहे हैं लेकिन इस जनता को राशन लेने, दुकान चलाने की व पढा़ई करने की इजाजत नहीं है लेकिन ईमानदार जनता (गाय जैसी जनता) को मीडिया कुछ दिखाता है और जनता कुछ और ही देखती है क्या अब वह समय नहीं आया है जब ऐसी महामारी के समय जनता चुन...