आखिर हत्या हो ही गई भारत देश के लोकतंत्र की....
आखिर हत्या हो ही गई भारत देश की क्योंकि भारत देश भी एक देश है जहां लोकतंत्र होता है माफ कीजिए होता था
लेकिन अब नहीं है इस भारत देश में बहुत बड़ा तमाशा देखने को मिल रहा है शिक्षा के द्वार बन्द हैं और जनता अपने आप में इतनी धार्मिक मदमस्त हैं की मौत के इस घाट में वह खुद कब बलि बन गई पता ही ना चला
गलती होती हैं माना कि इस देश में सरकार को जो भी शक्तियां मिली वह सब इस देश की जनता ने दिया हैं लेकिन उसे अब सुधारना जरूरी नहीं है, संविधान तो इसे सुधारने की इजाजत देता हैं, लेकिन इस्तेमाल तो जनता को करना है अब तमाशा भी गजब है कि लोकतंत्र जिसमें जनता आती है अपनी ही मौत का तमाशा स्वयं दर्शक बनकर देख रही है कि कब उसका नंबर कब आएगा ।
और आज भी जनता मुक दर्शक बनकर देख रही है सरकार बड़ी-बड़ी चुनावी रैलियां कर रही है लोग सीधे वोट देने भी जा रहे हैं लेकिन इस जनता को राशन लेने, दुकान चलाने की व पढा़ई करने की इजाजत नहीं है लेकिन ईमानदार जनता (गाय जैसी जनता) को मीडिया कुछ दिखाता है और जनता कुछ और ही देखती है क्या अब वह समय नहीं आया है जब ऐसी महामारी के समय जनता चुनाव का विरोध करें शाही स्नान बन्द करवायें।
जब महामारी इतनी बड़ी है तो इन्हें सबसे पहले चुनाव और यह धार्मिक स्थल पहले बंद करने चाहिए लाखों लोग एक जगह पानी में स्नान करते हैं ऐसी धार्मिक भावना से जनता को बेवकूफ बनाना कहां तक सही हैं यह भारत की जनता ही जाने लेकिन बेवकूफी की यह हद मैं मानता हूं बहुत ही चरम सीमा पर पहुंच चुकी हैं।
धार्मिक स्थलों के संबंध में मैंने एक फेक वीडियो देखा लेकिन उसे देखकर लगा कि वैसा इस देश में जरूर होना चाहिए लेकिन इसकी मांग कौन करें आप भी इस वीडियो को देखिए जो झूठा है लेकिन इसकी कितनी जरूरत है इस देश को
आज जनता मुक दर्शक बनी हुई हैं सरकार कुंभ में मेला शाही स्नान करवा रही हैं क्योंकि शाही स्नान से सरकार चलेंगी क्योंकि भारत भावनाओं में बहने वाला देश है और उनकी भावनाएं तभी समाप्त होगी जब यह दुनिया छोड़ कर के लोग जा चुके होंगे।
सरकार समझ चुकी हैं धर्म की भावना को लेकर भारत में बहुत आसानी से राज किया जा सकता है वो कर रही है लेकिन देश की जनता की आंखें नहीं खुली आस्था रखना अच्छी बात है लेकिन आस्था के नाम पर अपनी जान गवा देना कहां की समझदारी है।
अब तो जनता को यह चुनाव बंद करवाने और यह धार्मिक शाही स्नान को बन्द करवाने के लिए आवाज उठानी चाहिए अभी नहीं तो कब, कब तक सब्र और रखेगी जनता ।
मैं मानता हूं कि मीडिया बिका हुआ है लेकिन जनता को मीडिया केवल गुमराह कर सकता है लेकिन स्पष्ट पहलू को छुपा नही सकता है और यह सब देखने के बाद भी जनता यदि मूकदर्शक बनी रहे तो भारत के इतिहास में पहली बार इसका जिम्मेदार केवल 21वी सदी कि भारत की रहने वाली बेवकूफ और अंधविश्वासी जनता होगी जिसने न्याय के लिए एक भी आवाज ही नहीं उठाई इसका इतिहास गवाह होगा
आखिर संविधान के द्वारा दी गई ताकत का इस्तेमाल लोग क्यों नहीं करना चाहते क्यों मूकदर्शक बने हुए हैं।
🙏🙏✍️✍️✍️✍️🙄🙄🙄👩🔧👩🍳👩🌾👳👳🤵🧕🤶🙋🤦🤦🤦🗣️🗣️🗣️🗣️🗣️👬💪💪💪👊👊🤛🤜🤜🤜
भारत में भी जनता और राजनेता सभी के लिए एक से कानून होने चाहिए क्या ऐसा जरूरी नहीं लगता जब दूसरे देशों में हो सकता है तो हमारे यहां क्यों नहीं .........



Comments