जिस दिन इस देश में अलग-अलग जातियो के बीच रोटी और बेटी के सम्बन्ध कायम होने शुरु हो जायेंगे ,इस देश में जाति के आधार पर जो शोषण हैं,गैरबराबरी हैं वो खत्म हो जायेगी।
जब तक लोगों को सामाजिक स्वतंत्रता नहीं मिलती तब तक कानूनी स्वतंत्रता उनके लिए बेईमानी होगी लोगों को समझना चाहिए कि एक समाज में सामाजिक कुर्तियां तब तक समाप्त नहीं हो पायेगी जब तक आर्थिक रूप से समानता ना हो जाये
भारत देश में आज समय की मांग सच में आज भारत ऐसे दौर से गुजर रहा है जब लोगों ने अपने आप को संविधान से ऊपर रख लिया है और यही कारण है कि आज भारत दुनिया का एक ऐसा देश बन चुका है जहां असमानता चरम सीमा पर है आखिर भारत देश ऐसी स्थिति में कैसे पहुंच गया कारण सभी को मालूम है लेकिन सुधार कोई नहीं करना चाहता सुधार में क्या करना है यह भी सभी को मालूम है। भारतीय संविधान के निर्माता डॉ भीमराव अंबेडकर ने संविधान निर्माण के समय कहा था क्या इतिहास अपने आप को दोहराएगा यह विचार मुझे चिंता से भर देता है इस तथ्य के एहसास से यह चिंता और गहरी हो जाती है कि जाति और धर्म के ऊपर हमारे शत्रुओं के अलावा हमारे देश में अलग-अलग विरोधी धाराओं वाले राजनीतिक दल भी होंगे क्या भारत देश के लोग भारत देश को अपने पंथो से ऊपर रखेंगे क्या वह अपने पंथो को देश से ऊपर रखेंगे मैं नहीं जानता किंतु इतना तो निश्चित है कि हमारी आजादी दूसरी बार खतरे में पड़ जाएगी और शायद हमेशा के लिए खो जाएगी और वास्तव में आज हम ऐसे दौर पर पहुंच चुके हैं जब लोगों ने संविधान को मजाक बनाकर रख दिया है कोई भी व्यक्ति या स...
ईडब्ल्यूएस आरक्षण इसमें ₹800000 वार्षिक आय के आधार पर दिया गया है जिसे बनवाने के लिए इस देश के 100% लोग गैर कानूनी तरीके से इस पर रजिस्टर्ड हो चुके हैं या होने वाले हैं उन लोगों को सिर्फ और सिर्फ आर्थिक आधार दिखाई देता है। आर्थिक आधार कभी भी आरक्षण से संबंधित था ही नहीं इसका आधार सामाजिक था सामाजिक बहिष्कार एवं बहिष्कृत लोगों को संरक्षण प्रदान करना था सामाजिक और शैक्षिक समानता लाना था तो फिर यह उच्च वर्ग के लोग आर्थिक एजेंडे को आरक्षण से कैसे जोड़ सकते हैं देश की सरकार को और लोगों को इस पर विचार करना चाहिए। यदि समाज में समानता लाना है तो अंतरजातीय विवाह जैसी चीजों को प्रचलन में लाना चाहिए। इन से संबंधित कानून बनाने चाहिए । 1000 साल से चली आ रही व्यवस्था को 70 साल में बदलने की बात की जाती है यह कैसे संभव है जबकि पुरानी व्यवस्था के समय की तुलना में देखा जाए तो 70 साल में बहुत बड़े बदलाव देश में हुए हैं लोगों के जीवन स्तर में समानता आई है और इतने कम समय में सरकार इसे समाप्त करना चाहती है । 10% ईडब्ल्यूएस जैसे आरक्षण बिना किसी विचार विमर्श और बिना किसी आधार के दिए जाते हैं तो निश्चित ...
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