भारत में अंधविश्वास, भ्रष्टाचार कैसे समाप्त हो...



आज  बेईमानी  और स्वार्थ इस कदर आगे बढ़ चुका है की लोग भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने के लिए उसे रोकने वाली शक्ति शिक्षा, शिक्षा को ही समाप्त करना चाहते हैं क्योंकि शिक्षा ही वह माध्यम है जिससे लोग इसे दूर कर सकते है। 

आज अराजकता और अनैतिकता से भरे लोगों के द्वारा देश को बर्बाद करने की पहल चल चुकी है इसीलिए आज स्कूलों में शिक्षकों की व्यवस्था नहीं की जा रही है । क्योंकि धर्म के ठेकेदारों को अब समाज में विभिन्न वर्गों के लोग जो अपने बच्चों को एक स्थान पर पहुंचाते हैं एक जैसा व्यवहार करते हैं यह प्रतिक्रिया उन्हें देखी नहीं जा रही है इसलिए अब वह एक नया अध्याय रचने जा रहे हैं अमीरी और गरीबी का क्योंकि यही समाज के सबसे बड़े विनाशक है 

           क्योंकि इन लोगों की मानसिकता आजादी के पहले वाली हैं जिसमें धर्म के नाम पर लोगों को अंधविश्वासी बनाकर गुलाम बनाए रखा जाता था और एक वर्ग केवल सेवा लेने के लिए होता था वही दूसरा संपूर्ण समाज उनकी गुलामी करता था आज फिर से वैसी ही मानसिकता के आधार को लाने का प्रयास हो रहा है आज शिक्षा व्यवस्था अपने अंतिम दौर पर पहुंच चुकी हैं यदि देश के लोगों को अभी भी यह लगता है की शिक्षा व्यवस्था से कोई सुधार नहीं होता तो वह जान ले अभी तक जितने सुधार हुए हैं वह शिक्षित लोगों ने ही किए हैं और आगे भी करेंगे लेकिन यदि शिक्षा व्यवस्था केवल अमीरों के लिए रहेगी तो यह देश के लिए अभिशाप बन कर रह जाएगी।


देश की शिक्षा व्यवस्था का एक वर्ग जानकार वर्ग उसका फायदा तभी उठा सकता है जब शिक्षा व्यवस्था का दूसरा वर्ग शिक्षा से अनभिज्ञ वर्ग हो लेकिन यदि दोनों ही वर्ग शिक्षित होंगे तो फिर शोषण भ्रष्टाचार अराजकता को समाप्त किया जा सकता है।


   अतः शिक्षा व्यवस्था में निजी करण की अपेक्षा सरकारी स्कूलों की आवश्यकता है जिसमें ज्यादा से ज्यादा शिक्षा निशुल्क होनी चाहिए जो प्रत्येक वर्ग प्राप्त कर सकें।

   आज भी सरकारी स्कूल के बच्चों के माता-पिता कभी भी शिक्षा स्कूलों में कैसी चल रही है उस पर उनका कोई ध्यान नहीं होता और यही कारण है कि सरकारी स्कूल बदतर हालत में पहुंच चुके हैं जहां शिक्षकों की व्यवस्था नहीं है संसाधन नहीं है और जो कुछ शिक्षक हैं वह ईमानदारी से कार्य नहीं करते हैं इन सभी के जिम्मेदार केवल बच्चों के माता-पिता है और आज स्थिति यह आ चुकी है कि उन स्कूलों को ही समाप्त करने की बात कही जा रही है आगे इन लोगों के बच्चे पढ़ नहीं पाएंगे और केवल और केवल गुलामों की तरह आजादी की जिंदगी जिएंगे इसलिए अभी सजग हो जाने की आवश्यकता है की सरकारी स्कूलों में सभी व्यवस्था करवाएं और धर्म पूजा पाठ की अपेक्षा उससे भी महत्वपूर्ण जो शिक्षा व्यवस्था के सुधार पर अपना संपूर्ण योगदान दे। 

           भविष्य में शिक्षा व्यवस्था ना होने पर ऊंच-नीच कि इतनी बड़ी परिपाटी बन सकती है जिसे भरना बहुत ही मुश्किल हो जाएगा इसलिए जनता को स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था सभी के लिए हो इसके लिए  सभी  को काम करना चाहिए अन्यथा आप अपने बच्चों और आने वाली पीढ़ी को जहर देने वाले साबित होंगे।

     

 
 

कहते हैं किसी भी देश को बर्बाद करना हो तो पहले उसकी शिक्षा व्यवस्था को बर्बाद कर दो जनता अनपढ़ रहेगी तो देश पर कब्जा करना आसान होगा राजस्थान में 500 स्कूल बंद हुए मध्य प्रदेश में 13000 स्कूल बंद कर दिए गए अन्य राज्य में भी आए दिन ऐसी खबरें मिलती हैं और नेताओं के जवाब स्कूल मर्ज किए जा रहे हैं, बच्चे नहीं हैं, नई व्यवस्था कर रहे हैं अब इन्हें कौन बताएं कि स्कूलों में शिक्षकों की आवश्यकता है बिना शिक्षकों के बच्चे क्यों पढ़ने आएंगे किससे पढ़ने आएंगे जबकि वास्तव में यह स्कूल को हमेशा के लिए बंद करने की तैयारी कर रहे हैं

           

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