भारतमें पूंजीकरण एक अभिशाप हैं।
अर्थव्यवस्था में पूंजीवाद की ओर बढ़ने वाली प्रकृति निंदनीय हैं इतिहास जानता है कि पूंजीवादी व्यवस्था में कार्य संचालन में केवल प्राइवेट कंपनी एवं ऐसी संस्थाओं द्वारा होता है जिसमें जिसमें मालिक होता है और मालिक का पद पीढ़ी दर पीढ़ी वाला होता है अर्थात मालिक का लड़का या उसका रिश्तेदार ही केवल उस कंपनी का मालिक बन सकता है,चाहे वह योग्यता हो या अयोग्य हो।
यह वैशी व्यवस्था हैं जैसे प्राचीन काल में राजा का लड़का ही राजा बन सकता था इस तरह पूंजीवादी लोग स्वयं अपने पुत्र या परिवार को ही उत्तराधिकारी बनाते हैं भले ही वह योग हो या अयोग्य।
इसलिए भारत इतिहास से इस व्यवस्था का विरोधी रहा है क्योंकि यह अनैसर्गिक हैं जिसमें गरीब, गरीब ही रह जाएगा और अपने जीवन में कभी सुधार नहीं कर सकता ऐसी व्यवस्था जो एक गरीब को गरीब बनाए रखना चाहती है उसकी योग्यता को नष्ट करती हैं यह एक मानवता का विनाश है, इसके सहारे मानव जाति का विनाश होना निश्चित हैं, भारत को अपने गौरव को बचाना हैं, तो इसका विरोध करना होगा।

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