भारत में गरीबी दूर कैसे हो सकती हैं।

एक देश की अर्थव्यवस्था केवल पूंजी या लोगों के पास निवेश करने से चलती है लेकिन भारत का पैसा लगभग 50% पैसा मंदिरों में ,या मंदिरों से जुड़े लोगों के पास जमा है यदि देश विदेशों से लोन लेता है और अपने पास में रखे पैसे को निष्क्रिय करके रखता है तो उस देश की अर्थव्यवस्था कैसे सुधर सकती है जरूरत है सही माइनों की धर्म को अपनी जगह रखना चाहिए और देश के विकास को अपनी जगह, लेकिन भारत जैंसी अर्थव्यवस्था में धर्म , अर्थव्यवस्था को नष्ट करने में अपनी भूमिका दे रहा है इसमें सुधार होना आवश्यक है इस वीडियो में आप देख सकते हैं

भारत
जैसी अर्थव्यवस्था में पिछड़ेपन का कारण सभी जानते हैं सभी समझते  हैं लेकिन कोई भी इस लेपन से बाहर नहीं आना चाहता।
      मनुष्य से धर्म है लेकिन धर्म से मनुष्य नहीं लेकिन मनुष्य ने अपने आपको बांध लिया हैं, गुलाम बना लिया है, लोगों को धर्म पर खर्च को बंद करना होगा तभी सुधार हो सकता हैं।

 क्या आपको नहीं पता है कि धर्म के ऊपर कितना खर्च होता है इसके कितने सारे एजेंट हैं और अमीरी और गरीबी का फर्क किस कारण से हो रहा है यह सब भारत में धर्म या धार्मिक अंधविश्वास के कारण सच्चे मायने सभी जानते हैं कि क्या होना चाहिए लेकिन कोई इस पर अमल नहीं करना चाहता सभी को सच्चाई पता है एक व्यक्ति इतना सारा पैसा जो मंदिरों पर खर्च करता है वह ना ही स्वयं का बल्कि पूरे देश का नुकसान करता है।

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