व्यक्ति के नीजि अधिकार क्या होना चाहिए
इतिहास गवाह है जब-जब अर्थशास्त्र और नैतिकता के बीच संघर्ष हुआ है तब जीत अर्थशास्त्र की हुई है क्योंकि नीहित स्वार्थो को स्वेच्छा से तब तक नहीं टाला जा सकता जब तक गरीब लोगों को आर्थिक रूप से सुदृढ़ नहीं बनाया जायें।
उदासिनता खतरनाक बीमारी हैं जो लौगो को पिछडेंपन और गरीबी की ओर ले जाती हैं।
भारत जैसी अर्थव्यवस्था में गरीबी और अमीरी के अंतर को मिटाने के लिए आवश्यक है कि एक ऐसे परिवार के व्यक्ति जो अच्छे पद या प्रतिष्ठित स्थिति में है तो उनसे उनकी अन्य पद या उनकी संपत्ति का अधिकार छीन लेना चाहिए क्योंकि अमीरी और गरीबी का फैसला इसी कारण से हो रहा है
जिस प्रकार यदि सरकारी नौकरी में एक पद से व्यक्ति यदि दूसरी पद में जाता है तो वह उसके पहले वाले पद को छोड़ देता है या छोड़ना पड़ता है इसी प्रकार इससे समझ सकते हैं कि जमीन को एक निजी संपत्ति ना मानते हुए 1 पद माना जाए और इसी एक निश्चित आधार बनाकर उसे संपत्ति का अधिकार आदि प्रदान किया जाना चाहिए इसके लिए कुछ नियम हो सकते हैं
धारा 1 -यदि व्यक्ति ₹20000 से अधिक वेतन किसी सरकारी या प्राइवेट कंपनी में पाता है तो उसे उसके जमीनी अधिकार से बेदखल कर देना चाहिए तथा संबंधित भूमि या संपति को उसके परिवार के अन्य व्यक्ति या ट्रस्ट बनाकर गरीबों के लिए उपयोग होना चाहिए।

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