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आरक्षण कैसे समाप्त हो सकता है

ईडब्ल्यूएस आरक्षण इसमें ₹800000 वार्षिक आय के आधार पर दिया गया है जिसे बनवाने के लिए इस देश के 100% लोग गैर कानूनी तरीके से इस पर रजिस्टर्ड हो चुके हैं या होने वाले हैं उन लोगों को सिर्फ और सिर्फ आर्थिक आधार दिखाई देता है। आर्थिक आधार कभी भी आरक्षण से संबंधित था ही नहीं इसका आधार सामाजिक था सामाजिक बहिष्कार एवं बहिष्कृत लोगों को संरक्षण प्रदान करना था सामाजिक और शैक्षिक समानता लाना था तो फिर यह उच्च वर्ग के लोग आर्थिक एजेंडे को आरक्षण से कैसे जोड़ सकते हैं देश की सरकार को और लोगों को इस पर विचार करना चाहिए। यदि समाज में समानता लाना है तो अंतरजातीय विवाह जैसी चीजों को प्रचलन में लाना चाहिए।  इन से संबंधित कानून बनाने चाहिए । 1000 साल से चली आ रही व्यवस्था को 70 साल में बदलने की बात की जाती है यह कैसे संभव है जबकि पुरानी व्यवस्था के समय की तुलना में देखा जाए तो 70 साल में बहुत बड़े बदलाव देश में हुए हैं लोगों के जीवन स्तर में समानता आई है और इतने कम समय में सरकार इसे समाप्त करना चाहती है । 10% ईडब्ल्यूएस जैसे आरक्षण बिना किसी विचार विमर्श और बिना किसी आधार के दिए जाते हैं तो निश्चित ...

Vivek bindra in lalantop show

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सरकारी कर्मचारी स्वयं के पैर में कुल्हाड़ी मार रहे हैं...

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सरकारी कर्मचारी स्वयं के पैर में कुल्हाड़ी मार रहे हैं... हमारा देश आज जिस भ्रष्टाचार की स्थिति में है हर छोटे से छोटा गरीब व्यक्ति हो या बड़े से बड़ा अमीर व्यक्ति हो उसे अपने काम के बदले जो पैसे मिलते हैं उससे कभी खुशी नहीं मिलती उसकी तनख्वाह जो भी हो उसे प्राप्त करने के बाद उसे कोई खुशी नहीं मिलती लेकिन गलत तरीके से अगर उसने कुछ भी पैसे कमा लिया तो उसकी खुशी अपने आप में कई गुनी हो जाती है यह समाज किस मनोवृत्ति पर पहुंच चुका है यह बताने की आवश्यकता नहीं है खासकर सरकारी विभाग में देखें तो अधिकारी कर्मचारी उन्हें उनकी आवश्यकताओं व योग्यताओं के आधार पर उचित वेतन मिलता है लेकिन वह फिर भी खुश तभी दिखाई देते हैं जब उन्होंने कहीं से रिश्वत पाई हो या किसी ने उन्हे नासमझी के कारण उन्हें कुछ अधिक पैसे दे दिये हो।  समाज को बर्बाद करने में भ्रष्ट करने में सबसे बड़ा हाथ सरकारी कर्मचारियों का ही है और इन्होने ही लौगो की ऐसी मनोवृत्ति बना दी हैं हमेशा राजनीतिक दबाव के कारण यह भ्रष्ट नहीं होते हैं भ्रष्ट यह अपने स्वयं के स्वभाव के कारण हो रहे हैं अपने स्वभाव में इन्होंने मान लिया है कि बिना रिश्व...

देश में आज समय की मांग

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  भारत देश में आज समय की मांग सच में आज भारत ऐसे दौर से गुजर रहा है जब लोगों ने अपने आप को संविधान से ऊपर रख लिया है और यही कारण है कि आज भारत दुनिया का एक ऐसा देश बन चुका है जहां असमानता चरम सीमा पर  है आखिर भारत देश ऐसी स्थिति में कैसे पहुंच गया कारण सभी को मालूम है लेकिन सुधार कोई नहीं करना चाहता सुधार में क्या करना है यह भी सभी को मालूम है। भारतीय संविधान के निर्माता डॉ भीमराव अंबेडकर ने संविधान निर्माण के समय कहा था क्या इतिहास अपने आप को दोहराएगा यह विचार मुझे चिंता से भर देता है इस तथ्य के एहसास से यह चिंता और गहरी हो जाती है कि जाति और धर्म के ऊपर हमारे शत्रुओं के अलावा हमारे देश में अलग-अलग विरोधी धाराओं वाले राजनीतिक दल भी होंगे क्या भारत देश के लोग भारत देश को अपने पंथो से ऊपर रखेंगे क्या वह अपने  पंथो  को  देश  से ऊपर रखेंगे मैं नहीं जानता किंतु इतना तो निश्चित है कि हमारी आजादी दूसरी बार खतरे में पड़ जाएगी और शायद हमेशा के लिए खो जाएगी और वास्तव में आज हम ऐसे दौर पर पहुंच चुके हैं जब लोगों ने संविधान को मजाक बनाकर रख दिया है कोई भी व्यक्ति या स...

Jai bhim movie 2021

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https://111.90.159.132/drama/jai-bhim/ प्रकृति ने दुनिया में एक चीज बनाई थी वह है इंसान जो कि दूसरों के दुखों को समझ सकता है और उनकी  समस्याओं का समाधान भी कर सकता है । लेकिन इंसान अपने ही इस विशेष गुण भूल चुका है यदि इस दुनिया में इंसान ही अपने इस काम को भूल जाएगा और अन्य प्राणी की तरह व्यवहार करेगा तो यह दुनिया कैसे चलेगी। Biography movie dr. Bhimrao Ambedkar- https://youtu.be/lDqn0QUPxBY          Other movies socialism 1 Teesri ajadi https://youtu.be/wS_8dSQaxYY   2shudra the rising https://youtu.be/rJmUFxrOU64 3shudra the Khalsa https://youtu.be/-JOPGAB4IEM 4aarakshan https://youtu.be/9tRJK3PiUts 5.saranam gacchami https://youtu.be/-JOPGAB4IEM          

आखिर हत्या हो ही गई भारत देश के लोकतंत्र की....

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  आखिर हत्या हो ही गई भारत देश की क्योंकि भारत देश भी एक देश है जहां लोकतंत्र होता है माफ कीजिए होता था    लेकिन अब नहीं है इस भारत देश में बहुत बड़ा तमाशा देखने को मिल रहा है शिक्षा के द्वार बन्द हैं और जनता अपने आप में इतनी धार्मिक मदमस्त हैं की मौत के इस घाट में वह खुद कब बलि बन गई पता ही ना चला   गलती होती हैं माना कि इस देश में सरकार को जो भी शक्तियां मिली वह सब इस देश की जनता ने दिया हैं लेकिन उसे  अब सुधारना जरूरी नहीं है,  संविधान तो इसे सुधारने की इजाजत देता हैं, लेकिन इस्तेमाल तो जनता को करना है अब तमाशा भी गजब है कि लोकतंत्र जिसमें जनता आती है अपनी ही मौत का तमाशा स्वयं दर्शक बनकर देख रही है कि कब उसका नंबर कब आएगा ।  और आज भी जनता मुक दर्शक बनकर देख रही है सरकार बड़ी-बड़ी चुनावी रैलियां कर रही है लोग सीधे वोट देने भी जा रहे हैं लेकिन इस जनता को राशन लेने, दुकान चलाने की व पढा़ई करने की इजाजत नहीं है लेकिन ईमानदार जनता (गाय जैसी जनता) को मीडिया कुछ दिखाता है और जनता कुछ और ही देखती है क्या अब वह समय नहीं आया है जब ऐसी महामारी के समय जनता चुन...

भारत में अंधविश्वास, भ्रष्टाचार कैसे समाप्त हो...

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आज  बेईमानी  और स्वार्थ इस कदर आगे बढ़ चुका है की लोग भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने के लिए उसे रोकने वाली शक्ति शिक्षा, शिक्षा को ही समाप्त करना चाहते हैं क्योंकि शिक्षा ही वह माध्यम है जिससे लोग इसे दूर कर सकते है।  आज अराजकता और अनैतिकता से भरे लोगों के द्वारा देश को बर्बाद करने की पहल चल चुकी है इसीलिए आज स्कूलों में शिक्षकों की व्यवस्था नहीं की जा रही है । क्योंकि धर्म के ठेकेदारों को अब समाज में विभिन्न वर्गों के लोग जो अपने बच्चों को एक स्थान पर पहुंचाते हैं एक जैसा व्यवहार करते हैं यह प्रतिक्रिया उन्हें देखी नहीं जा रही है इसलिए अब वह एक नया अध्याय रचने जा रहे हैं अमीरी और गरीबी का क्योंकि यही समाज के सबसे बड़े विनाशक है              क्योंकि इन लोगों की मानसिकता आजादी के पहले वाली हैं जिसमें धर्म के नाम पर लोगों को अंधविश्वासी बनाकर गुलाम बनाए रखा जाता था और एक वर्ग केवल सेवा लेने के लिए होता था वही दूसरा संपूर्ण समाज उनकी गुलामी करता था आज फिर से वैसी ही मानसिकता के आधार को लाने का प्रयास हो रहा है आज शिक्षा व्यवस्था अपने अंतिम दौर प...